”अंतरिक्ष से भारत माता की जय…, PM मोदी से बोले ISS में मौजूद कैप्टन शुभांशु शुक्ला, कहा-भारत सच में बहुत भव्य दिखता है,,
अंतरिक्ष से भारत माता की जय…
कैप्टन शुभांशु शुक्ला का भावुक संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम
लेखक:- Pawan kumar tripathi
प्रस्तावना
“भारत माता की जय!”—जब यह उद्घोष पृथ्वी से नहीं, बल्कि 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष से गूंजे, तो यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक यात्रा का प्रमाण बन जाता है। हाल ही में जब अंतरिक्ष में स्थित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संवाद करते हुए यह शब्द कहे, तो पूरा देश गर्व और उत्साह से झूम उठा।
इस संवाद ने न केवल भारत की बढ़ती अंतरिक्ष शक्ति को दुनिया के सामने लाया, बल्कि यह भी दर्शाया कि भारत का बेटा जब अंतरिक्ष की गहराइयों में जाता है, तब भी उसकी आत्मा अपनी मातृभूमि से जुड़ी रहती है।
भारत का बेटा अंतरिक्ष में: शुभांशु शुक्ला
कैप्टन शुभांशु शुक्ला भारत के उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले से हैं। एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर उन्होंने जो सफलता की ऊंचाइयाँ छुईं, वह आज देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। उनका चयन NASA के माध्यम से अंतरिक्ष अभियानों में हुआ, और उन्होंने कठोर प्रशिक्षण के बाद अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अपना पहला मिशन शुरू किया।
शुभांशु शुक्ला न केवल एक वैज्ञानिक हैं, बल्कि एक राष्ट्रभक्त भी हैं। उनका हृदय भारत के लिए धड़कता है। यही कारण है कि जब उन्होंने पृथ्वी को अंतरिक्ष से देखा, तो उनकी जुबान से सहज ही निकल पड़ा—“भारत सच में बहुत भव्य दिखता है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ऐतिहासिक संवाद
25 जून 2025 को एक विशेष संवाद आयोजित किया गया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष और भारत के भविष्य पर संवाद किया। प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉल के माध्यम से अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़े शुभांशु शुक्ला से संवाद करते हुए कहा:
“कैप्टन शुभांशु, आपको देखकर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। आप भारत के युवा वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा हैं।”
इस पर कैप्टन शुभांशु भावुक होते हुए बोले:
“माननीय प्रधानमंत्री जी, मैं इस समय पृथ्वी के ऊपर 400 किलोमीटर की दूरी पर हूं, लेकिन मेरा दिल भारत में ही है। जब मैं भारत को अंतरिक्ष से देखता हूं तो वह सचमुच बहुत भव्य और दिव्य प्रतीत होता है। अंतरिक्ष से मैं गर्व के साथ कहता हूं—’भारत माता की जय!’”
भारत की अंतरिक्ष यात्रा: सपनों से यथार्थ तक
भारत की अंतरिक्ष यात्रा वर्षों की मेहनत, समर्पण और आत्मनिर्भरता की कहानी है। 1960 के दशक में जब डॉ. विक्रम साराभाई ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की नींव रखी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन भारत के युवा अंतरिक्ष यात्री अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह भारत का परचम लहराएंगे।
कुछ प्रमुख उपलब्धियाँ:
- 1975: भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट लॉन्च किया गया।
- 2008: चंद्रयान-1 के माध्यम से चंद्रमा पर जल की खोज।
- 2014: मंगलयान—भारत का पहला मंगल मिशन, जो पहले ही प्रयास में सफल रहा।
- 2023: चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग।
- 2025: शुभांशु शुक्ला का ISS पर मिशन, भारत की वैश्विक उपस्थिति का प्रमाण।
अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है?
जब शुभांशु से प्रधानमंत्री ने पूछा कि अंतरिक्ष से भारत को देखकर क्या महसूस होता है, तो उन्होंने जवाब दिया:
“भारत को जब रात में देखता हूं, तो उसकी रौशनी दिल को छू जाती है। हिमालय की सफेद चोटियां, गंगा की बहती धारा और थर का रेगिस्तान—सबकुछ एक दिव्य चित्र की तरह प्रतीत होता है। यह दृश्य मन को भावविभोर कर देता है।”
यह केवल एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव है, जो हर भारतीय में विद्यमान है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
शुभांशु शुक्ला का यह संवाद भारतीय युवाओं के लिए एक शक्तिशाली संदेश है। प्रधानमंत्री ने भी अपने संवाद में कहा:
“आज भारत का युवा न केवल नौकरी चाहता है, बल्कि वह राष्ट्रनिर्माण में भागीदारी चाहता है। विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और रिसर्च में भारत के युवा तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। शुभांशु जैसे युवाओं ने सिद्ध कर दिया है कि भारत की प्रतिभा अब सीमाओं में बंधी नहीं है।”
भारत और वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय
भारत अब केवल एक अवलोकनकर्ता नहीं, बल्कि एक निर्णायक शक्ति बन चुका है। NASA, ESA (European Space Agency), JAXA (Japan), और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियाँ अब ISRO के साथ सहयोग करने के लिए उत्सुक हैं। शुभांशु का ISS मिशन भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग का ही एक उदाहरण है, जिसमें भारतीय वैज्ञानिकों का योगदान दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिकों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है।
भावनात्मक क्षण: जब मां ने कहा—“मेरा बेटा चाँद पर है!”
शुभांशु की मां का एक इंटरव्यू सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने कहा:
“जब मेरा बेटा मुझे अंतरिक्ष से वीडियो कॉल करता है और कहता है कि वह धरती के ऊपर से भारत को देख रहा है, तो मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं। आज मुझे गर्व है कि मेरा बेटा केवल मेरा ही नहीं, पूरे भारत का है।”
‘भारत माता की जय’: केवल नारा नहीं, एक चेतना
शुभांशु शुक्ला द्वारा अंतरिक्ष से बोला गया “भारत माता की जय” न केवल एक भावनात्मक उद्गार है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक चेतना, वैज्ञानिक प्रगति, और आत्मबल का प्रतीक भी है।
यह उद्घोष अंतरिक्ष की गहराइयों में गूंजा और भारत की आत्मा को गहराई से छू गया। यह संदेश था उन सभी युवाओं के लिए जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने में लगे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल में विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान को प्राथमिकता दी। “गगनयान मिशन”, “स्टार्टअप इंडिया”, और “डिजिटल इंडिया” जैसी योजनाओं ने भारत के युवाओं को नई दिशा दी है। प्रधानमंत्री ने कहा:
“शुभांशु ने केवल अंतरिक्ष में जाकर इतिहास नहीं रचा, बल्कि भारत के आत्मविश्वास को नई ऊँचाई दी है।”
निष्कर्ष
आज जब शुभांशु शुक्ला जैसे युवा भारत का प्रतिनिधित्व अंतरिक्ष जैसे जटिल और उच्च तकनीकी क्षेत्र में कर रहे हैं, तब हर भारतीय का सिर गर्व से ऊँचा हो जाता है। उनका “भारत माता की जय” केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि यह विश्वास है कि भारत न केवल पृथ्वी पर, बल्कि ब्रह्मांड के किसी भी कोने में अपनी छाप छोड़ सकता है।
यह वह समय है जब भारत अपने वैज्ञानिकों, नवप्रवर्तकों और युवाओं की ताकत के साथ विश्व गुरु बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
जय हिंद।
भारत माता की जय।
