ऑपरेशन सिंदूर में दी थी सटीक जानकारी, खालिस्तानी आतंकियों का काल… जानें कौन हैं RAW के नए चीफ पराग जैन, जिनसे PAK भी आर्मी खाती है खौफ
भूमिका: भारत की खुफिया ताकत को मिला नया नेतृत्व
भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) को नया प्रमुख मिल चुका है — पराग जैन, जो अपने अद्भुत खुफिया विश्लेषण, रणनीतिक पकड़ और राष्ट्रहित में अचूक निर्णय लेने के लिए जाने जाते हैं। जैसे ही उनकी नियुक्ति की खबर सामने आई, देश के साथ-साथ पाकिस्तान और खालिस्तानी नेटवर्क में भी खलबली मच गई। कारण साफ है—पराग जैन वही अफसर हैं जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में निर्णायक भूमिका निभाई थी और खालिस्तानी नेटवर्क की रीढ़ तोड़ दी थी।
कौन हैं पराग जैन?
पराग जैन एक सीनियर IPS अधिकारी हैं, जो खुफिया एजेंसियों में दो दशकों से अधिक समय तक सक्रिय रहे हैं। उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में अपनी नियुक्ति के बाद, जल्द ही खुफिया नेटवर्क की जटिलताओं को समझा और RAW के एक भरोसेमंद और रणनीतिक विशेषज्ञ के रूप में उभरे।
उनकी कार्यशैली, मूक परंतु मारक रणनीतियाँ, और जमीन से जुड़ा खुफिया अनुभव उन्हें भारत के सबसे प्रभावशाली जासूसी अधिकारियों में से एक बनाता है।
ऑपरेशन सिंदूर: पराग जैन की सबसे बड़ी सफलता
“ऑपरेशन सिंदूर” एक गुप्त अभियान था जिसे भारत सरकार ने खालिस्तानी आतंकियों और उनके विदेश में चल रहे नेटवर्क के खात्मे के लिए शुरू किया था। इस ऑपरेशन की नींव और सफलता की चाबी पराग जैन ने रखी।
मुख्य बिंदु:
- ऑपरेशन कनाडा, ब्रिटेन, और अमेरिका जैसे देशों में एक्टिव खालिस्तानी फंडिंग चैनलों और नेटवर्क को डिकोड करने पर केंद्रित था।
- पराग जैन ने इनपुट्स के ज़रिए विदेश में बैठे आतंकी नेताओं की आवाजाही, मीटिंग्स और धन प्रवाह पर नज़र रखी।
- इस ऑपरेशन के तहत कई छद्म NGOs और बिज़नेस फंडिंग मॉडल्स को एक्सपोज़ किया गया, जो खालिस्तानी आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे थे।
इस मिशन की सफलता ने भारत की अंतरराष्ट्रीय साख को बढ़ाया और यह साबित कर दिया कि भारत अब केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक रणनीति अपनाने के लिए तैयार है।
PAK आर्मी को भी है डर: क्यों कांपता है पाकिस्तान पराग जैन के नाम से?
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और सेना ने लंबे समय तक भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए आतंकियों और कट्टरपंथी संगठनों का सहारा लिया है। लेकिन पराग जैन के नेतृत्व में RAW ने ISI की कई चालों को नाकाम कर दिया।
उनकी खास उपलब्धियाँ:
- LoC पर PAK फंडेड टेरर नेटवर्क की सटीक जानकारी: जिसके आधार पर इंडियन आर्मी ने कई सफल सर्जिकल स्ट्राइक्स कीं।
- ISI के एजेंट्स का भंडाफोड़: भारत के बड़े शहरों में सोए सेल्स को उन्होंने अलर्ट किया और कई बड़े हमलों को रोका गया।
- Panjshir इंटरसेप्शन: अफगानिस्तान में ISI के प्रयासों को RAW द्वारा बेनकाब करना, जिसकी प्लानिंग में पराग जैन की रणनीति महत्वपूर्ण रही।
PAK आर्मी को भय है कि पराग जैन के RAW चीफ बनने के बाद अब भारत की रणनीति और भी तेज, गुप्त और असरदार होगी।
खालिस्तानी मॉड्यूल का ध्वंस: विदेशों में मिशन
कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, UK और अमेरिका जैसे देशों में पिछले कुछ वर्षों में खालिस्तानी तत्वों की गतिविधियाँ बढ़ी हैं। भारत की ओर से बार-बार चेतावनी के बावजूद यह नेटवर्क स्लीपर सेल्स के रूप में सक्रिय रहा। पराग जैन की टीम ने:
- फंडिंग सोर्सेस को इंटरसेप्ट किया।
- पाकिस्तानी हैंडलर्स से जुड़े चैट्स, कॉल्स और डेटा एक्सेस किया।
- डिप्लोमैटिक प्रेशर के माध्यम से इन देशों की सरकारों से RAW ने खालिस्तानी नेताओं पर कार्रवाई करवाई।
पराग जैन के नेतृत्व में खालिस्तानी नेटवर्क की नींव हिल चुकी है, जिससे राष्ट्रविरोधी शक्तियाँ बौखला उठी हैं।
RAW में भूमिका और नेतृत्व शैली
पराग जैन की नियुक्ति केवल एक औपचारिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक संकेत है कि भारत अब खुफिया मामलों में आक्रामक, भविष्यदर्शी और आत्मनिर्भर दृष्टिकोण अपनाने जा रहा है।
उनकी विशेषताएँ:
- साइलेंट ऑपरेटर: बिना प्रचार के, ज़मीन से जुड़े मिशन को अंजाम देना।
- डाटा एनालिटिक्स में दक्षता: टेक्नोलॉजी का बेहतर इस्तेमाल।
- ह्यूमन इंटेलिजेंस (HUMINT) नेटवर्क का विस्तार।
- साइबर खुफिया पर गहरी पकड़।
राजनीतिक और कूटनीतिक सशक्तिकरण
पराग जैन को सरकार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का पूरा समर्थन प्राप्त है। मोदी सरकार की “Zero Tolerance on Terror” नीति को पराग जैन जैसे अधिकारी पूरी शक्ति से लागू करेंगे।
उनकी रणनीति केवल आतंकी साजिशों को नष्ट करना नहीं, बल्कि भारत के अंतर्राष्ट्रीय मित्रों के साथ इंटेलिजेंस साझेदारी को मजबूत करना भी है।
पिछले RAW प्रमुखों से तुलना
जहां अजीत डोभाल ने खुफिया कार्रवाई को सर्जिकल और रणनीतिक बनाए रखा, वहीं सामंत गोयल के कार्यकाल में साइबर और बाह्य नेटवर्क की सफाई पर जोर रहा। अब पराग जैन तकनीकी और जमीनी जानकारी को जोड़कर हाइब्रिड इंटेलिजेंस रणनीति पर काम कर रहे हैं।
आम जनता के लिए संदेश
हालांकि RAW जैसी संस्था का कार्य क्षेत्र गोपनीय होता है, लेकिन आम नागरिकों के लिए पराग जैन का काम यह संदेश देता है:
- देश को सुरक्षित रखने के लिए जो दृश्य नहीं, अदृश्य कार्य हो रहे हैं — वे और भी मजबूत होंगे।
- आतंकवाद, कट्टरता और विदेशी हस्तक्षेप अब भारत की संप्रभुता को प्रभावित नहीं कर पाएंगे।
- युवाओं को खुफिया क्षेत्र में करियर और नवाचार की प्रेरणा मिलेगी।
चुनौतियाँ जो अब पराग जैन के सामने होंगी
- साइबर युद्ध और डिजिटल स्पायिंग को रोकना।
- ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित जासूसी से निपटना।
- भविष्य के हाइब्रिड युद्ध (Hybrid Warfare) के लिए देश को तैयार करना।
- इंटरनल स्लीपर सेल्स की पहचान और निराकरण।
निष्कर्ष: भारत को मिला एक रणनीतिक योद्धा
RAW के नए चीफ पराग जैन की नियुक्ति केवल एक पद का बदलाव नहीं, बल्कि भारत की खुफिया रणनीति का पुनर्गठन है। एक ऐसा अफसर जिसने पहले ही अपनी अचूक सटीकता और गुप्त अभियान की सफलताओं से खुद को साबित किया है — अब वह देश की सबसे महत्वपूर्ण खुफिया संस्था की कमान संभाल रहा है।
पाकिस्तान, खालिस्तानी नेटवर्क और भारत विरोधी ताकतों के लिए यह सीधा संकेत है — भारत अब न तो चुप रहेगा, और न ही सहन करेगा।
भारत की सुरक्षा में लगे इन अज्ञात नायकों को नमन।
जय हिंद।
